Free video sex chating in mumbai

वो एक ऐसे फिरके (वर्ग) से है जिसे मुसलमानों का कोई फिरका मुसलमान नहीं समझता. जाकिर भाई खुले तौर पर कादियानियों को काफिर बोलते हैं. v=8TUek3Zth YAइससे पहले हम आगे कुछ लिखें, बताते चलें कि मुसलमान दोस्त क्यों कादियानियों से नफरत करते हैं.

यहाँ तक कि उन्हें काफिरों से भी बदतर समझा जाता है और सब मुस्लिम मुल्कों में उस पर पाबंदी है. असल में कादियानी फिरका मुहम्मद साहब को आखिरी पैगम्बर नहीं समझता.

हम जाकिर भाई से पूछना चाहते हैं कि उन्होंने अपने चाहने वाले एक सच्चे मुसलमान के लिए क्या रास्ता छोड़ा है?

यही कि या तो जाकिर भाई की तरह कादियानियों के शुक्रगुजार हों और उनके कर्जदार हो जाएँ या फिर इस्लाम को दाग लगाने वाले जाकिर भाई से ही तौबा कर लें!

और इसी कारण आज दुनिया के अधिकांश मुसलमान मुल्कों में कादियानी फिरके को सरकारी तौर पर भी काफिर माना जाता है.

वे खुद इस बात को बड़े फख्र से पेश करते हैं कि वो इस्लाम और बाकी मजहबों के तालिब इ इल्म (विद्यार्थी) हैं.

लफ्ज़ दर लफ्ज़ (शब्दशः) किसी की किताब से बिना पूछे चोरी करना और उसका शुक्रिया अदा करना तो दूर, उसका नाम भी नहीं लेना. एक कादियानी (काफिर) की बातों को मुसलमानों के बीच इस्लाम कह कर पेश करना यानी मुसलमानों को धोखा देना. और इस सारे काम की वाहवाही खुद लूटना जबकि यह किसी और का काम था और खुद को मजहबी मामलों का आलिम कहकर मुसलमानों को गुमराह करना. अपने चाहने वालों को कादियानियों के सामने जलील होने की वजह बनना. वेदों में मुहम्मद का दावा होने पर भी वेदों को इल्हामी ना मानना. बड़ी चालाकी से कादियानी सिद्धान्तों को मुसलमानों में चुप चाप बढ़ावा देना ताकि किसी को कोई शक न हो.इन सब बातों से इस बात का शक होता है कि कहीं जाकिर भाई मुसलमान के भेष में कादियानी तो नहीं?

क्योंकि कादियानियों को ऊपर से गलत कहकर सीधे साधे मुसलमानों की भीड़ जुटाकर जाकिर भाई जब कादियानी किताबों की खासमखास बातों को ही फैलाने में लगे हैं तो इसका और क्या मतलब निकलता है?

इसके लिए उन्होंने न जाने कुरान, हदीस, सीरत, वेद, पुराण, उपनिषद्, भगवद गीता, मनुस्मृति, महाभारत, तौरेत, बाईबल, धम्म पद, गुरुग्रंथ साहिब, और न जाने क्या कुछ न सिर्फ पढ़ डाला है बल्कि याद भी कर लिया है.

दुनिया की हर मजहबी किताब में मुहम्मद (सल्लo) को ढूँढने का दावा भी किया है.

Leave a Reply